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पेट्रोल-डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी, 10 दिनों में तीसरी बार महंगाई का बड़ा झटका

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देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी हुई है। पिछले 10 दिनों में यह तीसरी बार है जब ईंधन के दाम बढ़े हैं, जिससे आम जनता पर महंगाई का दबाव बढ़ गया है।

देश में एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह लगातार तीसरी बार है जब पिछले 10 दिनों के भीतर ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं। नई वृद्धि के बाद आम जनता से लेकर परिवहन क्षेत्र तक पर महंगाई का सीधा असर देखने को मिल रहा है। रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर यात्रा और माल ढुलाई तक की लागत बढ़ने लगी है, जिससे लोगों के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ गया है।

सूत्रों और पेट्रोल पंप डीलरों के अनुसार पेट्रोल की कीमत में लगभग 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। नई दरें लागू होने के बाद राजधानी दिल्ली समेत देश के कई बड़े शहरों में ईंधन के दामों में बदलाव देखा गया है। सुबह से ही पेट्रोल पंपों पर वाहन चालकों की भीड़ और चर्चा का माहौल बना रहा, जहां लोग लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर अपनी चिंता व्यक्त करते नजर आए।

पिछले 10 दिनों में यह तीसरी बार है जब पेट्रोल और डीजल के दामों में वृद्धि हुई है। इससे पहले भी दो बार कीमतों में बढ़ोतरी की जा चुकी है, जिसके चलते कुल मिलाकर लगभग 2 से 3 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा दर्ज किया गया है। लगातार हो रही इस बढ़ोतरी ने आम जनता की आर्थिक स्थिति पर असर डालना शुरू कर दिया है। खासकर मध्यम वर्ग, नौकरीपेशा लोग और दैनिक यात्रा करने वाले लोग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव एक बड़ा कारण है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी भी घरेलू बाजार पर दबाव बना रही है। तेल विपणन कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार के आधार पर रोजाना ईंधन की कीमतों की समीक्षा करती हैं, जिसके कारण घरेलू बाजार में भी लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है।

डीजल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर परिवहन क्षेत्र पर पड़ता है। ट्रक, बस और मालवाहक वाहनों की संचालन लागत बढ़ने से वस्तुओं की ढुलाई महंगी हो जाती है। इसका असर धीरे-धीरे बाजार में दिखाई देने लगता है, जहां सब्जी, फल, दूध, अनाज और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो उन्हें किराए और भाड़े में भी वृद्धि करनी पड़ेगी, जिसका सीधा बोझ आम जनता पर पड़ेगा।

राजधानी दिल्ली सहित कई राज्यों में नई दरें लागू होने के बाद आम लोगों में नाराजगी और चिंता दोनों देखने को मिल रही है। कई वाहन चालकों का कहना है कि रोजाना पेट्रोल भरवाना अब पहले की तुलना में काफी महंगा हो गया है, जिससे उनके मासिक खर्च में बढ़ोतरी हो रही है। ऑटो, टैक्सी और डिलीवरी सेवाओं से जुड़े लोग विशेष रूप से प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि उनकी कमाई सीमित है लेकिन खर्च लगातार बढ़ रहा है।

इस बीच राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। विपक्षी दलों ने लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष का कहना है कि जब पहले से ही महंगाई का दबाव है, ऐसे समय में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ना आम जनता के लिए और अधिक परेशानी पैदा कर रहा है। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि यह बदलाव पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति और वैश्विक आर्थिक दबावों का परिणाम है, जिसमें घरेलू स्तर पर सीमित नियंत्रण संभव है।

आर्थिक विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती है तो आने वाले दिनों में ईंधन के दामों में और अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसका सीधा असर केवल परिवहन पर ही नहीं बल्कि समग्र महंगाई दर पर भी पड़ेगा। पहले से ही खाद्य वस्तुओं और आवश्यक सेवाओं की कीमतें बढ़ी हुई हैं, ऐसे में यह वृद्धि स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना सकती है।

ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इस बढ़ोतरी का असर महसूस किया जा रहा है। जहां शहरों में रोजाना यात्रा करने वाले लोग परेशान हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और परिवहन लागत बढ़ने की चिंता जताई जा रही है। किसानों का कहना है कि डीजल की कीमत बढ़ने से खेती की लागत भी बढ़ जाएगी, जिसका असर उनकी आय पर पड़ेगा।

कुल मिलाकर देखा जाए तो पिछले 10 दिनों में लगातार तीसरी बार हुई यह बढ़ोतरी देश की आर्थिक स्थिति और आम जनता के बजट पर सीधा असर डाल रही है। आने वाले दिनों में अगर ईंधन की कीमतों में स्थिरता नहीं आती है तो महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। फिलहाल सभी की नजरें अंतरराष्ट्रीय बाजार और तेल कंपनियों की अगली मूल्य नीति पर टिकी हुई हैं।

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